मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health)

अच्छा स्वास्थ्य शरीर एवं मन की स्थिति पर निर्भर करता है। दोनों का मनुष्य के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है। स्वस्थ व्यक्ति केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ होता है। स्वास्थ्य का अर्थ है कि शरीर एवं मन दोनों कुशलतापूर्वक एवं सन्तुलित रूप से काम कर रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य तथा सामाजिक प्रभावशीलता में महत्त्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है। एक सु-समायोजित व्यक्ति का शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा होता है और वह वांछनीय सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों से सम्पन्न होता है। उस का मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा होता है। प्रसन्न रहने वाले, आशावादी तथा सन्तुलित व्यक्तित्व रखने वाले व्यक्तियों का मानसिक स्वास्थ्य अच्छा समझा जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य की परिभाषाएँ (Definitions of Mental Health)

1. हैडफ़ील्ड का विचार (Hadfield’s view)- ‘समूचे व्यक्तित्व की पूर्ण एवं सन्तुलित क्रियाशीलता मानसिक स्वास्थ्य है।’

(“Mental health is full and harmonious functioning of the whole personality.”)

2. विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) – विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, “मानसिक स्वास्थ्य केवल रोग अथवा मनोविकार की अनुपस्थिति नहीं बल्कि पूर्ण शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक कुशलता की स्थिति है।’

(“Mental health is a state of complete physical, mental and social well-being and not merely absence of disease or infirmity.”)

3. बोएहम का विचार (Boehm’s view) – ‘मानसिक स्वास्थ्य सामाजिक क्रियाशीलता की ऐसी स्थिति एवं स्तर है जो समाज द्वारा स्वीकार्य होता है और व्यक्तिगत रूप से सन्तोषजनक होता है।’

(“Mental health is a condition and level of social functioning which is socially acceptable and personally satisfying.”)

4. वाईट हाऊस सम्मेलन (The White House Conference)– ‘व्यक्तियों की अपने प्रति तथा संसार के प्रति अधिकतम प्रभावशीलता, सन्तुष्टि, प्रसन्नता एवं सामाजिक रूप से स्वीकृत व्यवहार के साथ समायोजन और जीवन की वास्तविकताओं का सामना करने तथा उन्हें स्वीकारने की योग्यता को मानसिक स्वास्थ्य कहा जा सकता है।”

(“Mental health may be defined as the adjustment of the individuals to themselves and the world at large with a maximum of effectiveness, satisfaction, cheerfulness and socially considerable behaviour and the ability of facing and accepting the realities of life.”)

5. केट्टस एवं मोस्ले का विचार (View of Catts and Moslay) –’मानसिक स्वास्थ्य ऐसी योग्यता है जो हमें जीवन की कठिन स्थितियों के साथ समायोजन स्थापित करने में सहायता प्रदान करती है।”

(“Mental health is the ability which helps us to seek adjustment in the difficult situations of our life.”)

6. मैनिंगर का विचार (Menninger’s view) – ‘मनुष्यों का संसार एवं एक दूसरे के प्रति अधिकतम प्रभावशीलता तथा प्रसन्नता के साथ समायोजन स्थापित करना मानसिक स्वास्थ्य कहलाता है।”

(“Mental health is the adjustment of human beings to the world and to each other with the maximum of effectiveness and happiness.”)

7. लियूकन का विचार (Lewkan’s View) – ‘मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति वह है जो प्रसन्न रहता है, अपने पड़ोसियों के साथ शान्तिपूर्वक रहता है, अपने बच्चों को स्वस्थ नागरिक बनाता है और ये बुनियादी दायित्व पूरे करने के पश्चात् भी उस में इतनी शक्ति रहती है कि वह के हित के लिये कार्य कर सके।’

(“Mentally healthy person is one who is happy, lives peacefully with his neighbours, makes his children healthy citizens and after fulfilling such basic responsibilities is still empowered with sufficient strength to serve the cause of society in any way.”)

निष्कर्ष (Conclusion)

उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि मानसिक स्वास्थ्य मानवीय व्यक्तित्व की संतुलित क्रियाशीलता की स्थिति का नाम है। यह ऐसी मानसिक स्थिति है जिस में व्यक्ति को अपने तथा संसार के साथ प्रभावशाली समायोजन स्थापित कर के मानसिक शान्ति, सन्तुष्टि तथा प्रसन्नता मिलती है।’

(‘In the light of above definitions it can be concluded that mental health is a condition or a state of harmonious functioning of the human personality. It is a state of one’s peace of mind, satisfaction, happiness, effectiveness and harmony brought out by one’s level of adjustment with his self and the world at large.”)

मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health)

मानसिक स्वास्थ्य की अवधारणा को स्पष्ट करने वाली कुछ महत्त्वपूर्ण विशेषताएं (Characteristics) इस प्रकार हैं :

1. स्वीकारात्मक स्थिति (Positive state) – मानसिक स्वास्थ्य केवल मानसिक विकार के अभाव का नाम नहीं बल्कि स्वीकारात्मक स्थिति का नाम है।
2. गतिशील अवधारणा (Dynamic concept) – मानसिक स्वास्थ्य एक गतिशील अवधारणा है।
3. शारीरिक स्वास्थ्य (Physical health) -मानसिक स्वास्थ्य का यथा सम्भव उच्च स्तर प्राप्त करने के लिये अच्छा शारीरिक स्वास्थ्य अनिवार्य है।
4. उच्च स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य (Optimum mental health) – सम्पूर्ण मानसिक स्वास्थ्य सम्भव नहीं है। अतः ‘सम्पूर्ण मानसिक स्वास्थ्य’ (Perfect mental health) के स्थान पर यथा सम्भव ‘उच्च स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य’ कहना अधिक उचित है।
5. नैतिक स्तर से भिन्न (Different from ethical stanards)- मानसिक स्वास्थ्य नैतिक स्तर से भिन्न है। नैतिकता मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित नहीं बनाती। एक नैतिक व्यक्ति कई मानसिक विकारों जैसे यौन विकार, हताशाओं तथा कुण्ठाओं का शिकार हो सकता है।
6. सामाजिकता से भिन्न (Different from sociability)- मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिकता में भी अन्तर होता है। यह ज़रूरी नहीं कि एक मिलनसार व्यक्ति मानसिक रूप से भी स्वस्थ हो ।
7. कार्यकुशलता नहीं (Not the same as efficiency)- मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ कार्यकुशलता भी नहीं है। हो सकता है कि एक कार्यकुशल व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ न हो ।

निष्कर्ष (Conclusion)

उपर्युक्त दृष्टिकोणों से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि-
(1) मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा एवं विकास का विज्ञान एवं कला है।
(2) यह स्थिर, निरोग तथा संतुलित व्यक्तित्व है।
(3) एक मनुष्य, जो शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक और सामाजिक रूप से संतुलित है, एक सामान्य व्यक्ति कहलाता है और उसे मानसिक स्वास्थ्य का स्वामी कहा जाता है।
(4) मानसिक स्वास्थ्य उन नियमों तथा सिद्धान्तों का नियमित अध्ययन है जो हमारी वातावरण के साथ समायोजन तथा मेल-जोल प्राप्त करने में सहायता करते हैं और हमें शिक्षित करते हैं।
(5) यह अध्ययन हमें बौद्धिक रोगों से बचाता है।

(1) Mental hygiene is the science and art of preserving and maximising mental health.
(2) It stands for wholesome, stable and balanced personality.
(3) An individual who is balanced physically, mentally, emotionally and socially is known as normal man and is said to have enjoyed a good mental hygiene.
(4) Mental hygiene is the systematic study of those rules and laws which help us and train us to establish adjustment and co-ordination with the environment.
(5) It saves us from intellectual ailments.

मानसिक स्वास्थ्य के उद्देश्य

1. निरोधात्मक उद्देश्य (Preventing aim) – मानसिक स्वास्थ्य का एक प्रमुख उद्देश्य मानसिक दोषों की रोक-थाम है। यह तभी हो सकता है यदि व्यक्ति को निरोग व्यक्तित्व के विकास तथा जीवन अनुभवों के बीच सम्बन्ध समझाया जाये।

2. सुरक्षात्मक उद्देश्य (Preservative aim) – मानसिक स्वास्थ्य का दूसरा प्रमुख उद्देश्य है व्यक्ति तथा समूह के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा सम्भाल।

3. उपचारात्मक उद्देश्य (Curative aim) – मानसिक रोग के कारण मालूम करके इनका इलाज करना मानसिक स्वस्थ्य का एक और महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है।

4. एकसार काम करने तथा समायोजन प्राप्त करने का उद्देश्य (Harmonious functioning and adjustive aim)– मानसिक स्वास्थ्य का अन्तिम उद्देश्य व्यक्ति को इस योग्य बनाना है कि वह एकसारता से अपने काम करे। यह उस की बदलते वातावरण के अनुसार शिक्षा सम्बन्धी, व्यवसाय सम्बन्धी, समाज सम्बन्धी, लिंग सम्बन्धी तथा निजी समायोजन प्राप्त करने में सहायता करता है।

मानसिक स्वास्थ्य के आयाम (Dimensions of Mental Health)

मानसिक स्वास्थ्य की अवधारणा को मानसिक स्वास्थ्य के आयामों के प्रकाश में अधिक स्पष्ट किया जा है सकता है (Concept of mental health can be further clarified in the light of dimensions of mental health) –

1. अपने प्रति दृष्टिकोण (Attitude towards self) – इस का सम्बन्ध आत्म-स्वीकृति एवं आत्म-मूल्यांकन के साथ है अर्थात् अपनी कमज़ोरियों तथा शक्तियों के साथ अपने आप को पहचानना ।

2. वास्तविकता का बोध (Perception of reality)– यह अपनी तथा अपने सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण की वास्तविकता को समझने की योग्यता के साथ सम्बन्धित है।

3. व्यक्तित्व की अखण्डता (Integration of personality)– इस में मानसिक शक्तियों का सन्तुलन, जीवन के प्रति एकीकृत (United) दृष्टिकोण और चिन्ता तथा तनाव सहने की योग्यता सम्मिलित हैं।

4. क्षमतायें (Competencies)– इन में वे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं संवेगात्मक क्षमतायें सम्मिलित हैं जो जीवन की समस्याओं का सामना करने के लिये आवश्यक होती हैं।

5. कार्य की स्वायत्तता (Autonomy of action)- जब व्यक्ति अपने भीतर से कार्य-व्यवहार को निश्चित करता है तो उस के कार्य में स्वायत्तता आ जाती है। इस में पर्याप्त आत्म-निर्भरता, दायित्व, आत्म-निर्देशन तथा सामाजिक प्रभावों से स्वतन्त्रता के गुण निहित होते हैं।

6. आत्म-वास्तवीकरण (Self-actualisation)– इस का अर्थ है-अपनी क्षमताओं का अधिकतम विकास करना और उन्हें अपने शब्दों कार्यों तथा विचारों द्वारा सर्वोत्तम योग्यता के साथ अभिव्यक्त करना।

7. पर्यावरण पर निपुणता प्राप्त करना (Mastery of Environment) – यह निम्नलिखित द्वारा प्राप्त की जा सकती है-

(1) प्रेम करने की योग्यता।
(2) अपने पर्यावरण से सन्तुष्टि प्राप्त करने की योग्यता।
(3) प्रेम, कार्य एवं खेल में सक्षम होना।
(4) मानवीय सम्बन्ध स्थापित करने में सक्षम होना।
(5) परिवर्तनशील स्थितियों में समायोजन की योग्यता।
(6) जीवन प्रक्रिया में समस्या समाधान दृष्टिकोण अपनाने की मानसिक इच्छा।

My name is Achyut Kumar. I am an Assistant Professor by profession.

Leave a Comment

error: Content is protected !!